एग्रीमेंट टू ट्रांसफर में दर्ज होता है कि एक व्यक्ति किन शर्तों पर फ्लैट, दुकान, गाला या किराए की जगह में अपने अधिकार दूसरे को ट्रांसफर करता है — अंतिम डीड ऑफ ट्रांसफर से पहले या उसके साथ। इस पर ट्रांसफर किए अधिकारों के बाज़ार मूल्य पर कन्वेयंस जितनी स्टाम्प ड्यूटी लगती है और सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन होता है। ट्रांसफर मान्य होने के लिए आमतौर पर सोसायटी, मकान-मालिक या अलॉटिंग प्राधिकरण की सहमति/NOC चाहिए।
एग्रीमेंट टू ट्रांसफर कब इस्तेमाल होता है
- कोऑपरेटिव सोसायटी के फ्लैट और दुकानें — सोसायटी सदस्यता और शेयरों के साथ फ्लैट का ट्रांसफर।
- मुंबई और पुणे की किरायेदारी (पगड़ी) जगहें — मकान-मालिक की सहमति से पुराना किरायेदार नए किरायेदार को किरायेदारी ट्रांसफर करता है।
- औद्योगिक गाले और कमर्शियल यूनिट — अलॉटमेंट या ऑक्यूपेंसी अधिकार पर।
- परिवार या पार्टनर के बीच ट्रांसफर — ऐसे अधिकारों का जो पूर्ण मालिकाना नहीं हैं।
विक्रेता के पास स्पष्ट फ्रीहोल्ड मालिकाना हो तो आमतौर पर एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड बेहतर है। बुक किया निर्माणाधीन फ्लैट बेच रहे हों तो देखें एग्रीमेंट टू असाइनमेंट।
एग्रीमेंट टू ट्रांसफर के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
ट्रांसफर करने वाला
- आधार और पैन कार्ड
- पिछला रजिस्टर्ड एग्रीमेंट या अलॉटमेंट लेटर
- शेयर सर्टिफिकेट (सोसायटी फ्लैट) या किराया रसीदें (किरायेदारी)
- सोसायटी या मकान-मालिक का नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट
ट्रांसफर पाने वाला
- आधार और पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
सहमति
- सोसायटी NOC या मकान-मालिक का सहमति पत्र
- लागू हो तो प्राधिकरण की ट्रांसफर अनुमति
- दो गवाहों का आधार
एग्रीमेंट टू ट्रांसफर की प्रक्रिया कैसे होती है
- अधिकार पहचानें
दस्तावेज़ों से देखते हैं कि विक्रेता के पास असल में क्या है — मालिकाना, सदस्यता, किरायेदारी या अलॉटमेंट।
- सहमति
सोसायटी, मकान-मालिक या प्राधिकरण के लिए NOC आवेदन तैयार करते हैं।
- ड्राफ्ट
कीमत, पेमेंट शेड्यूल, हैंडओवर, बकाया और सहमति की शर्तें दर्ज।
- स्टाम्प और रजिस्टर
अधिकारों के बाज़ार मूल्य पर ई-चालान से ड्यूटी; सब-रजिस्ट्रार पर रजिस्ट्रेशन।
- ट्रांसफर पूरा करें
डीड ऑफ ट्रांसफर, शेयर सर्टिफिकेट ट्रांसफर या आपके नाम नई किराया रसीद।
अपना एग्रीमेंट टू ट्रांसफर बिना उलझन के पूरा करें
अपनी जानकारी WhatsApp पर भेजें। भुगतान से पहले ही हम दस्तावेज़ों की सटीक सूची और स्टाम्प ड्यूटी का अनुमान देते हैं।
अधिकार ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स ट्रांसफर दस्तावेज़ पर इस आधार पर ड्यूटी लगाते हैं कि वह असल में क्या करता है। प्रतिफल के बदले फ्लैट, दुकान या किरायेदारी का ट्रांसफर आमतौर पर रेडी रेकनर से निकाले गए ट्रांसफर अधिकारों के बाज़ार मूल्य पर कन्वेयंस जितना चार्ज होता है। किराए वाली जगहों के लिए रेडी रेकनर में विशेष मूल्यांकन नियम हैं, जिनसे मूल्य आमतौर पर खाली यूनिट से कम आता है।
हस्ताक्षर से पहले हम सटीक रकम निकालते हैं और मूल्य अस्पष्ट हो तो बाद की पेनल्टी से बचने के लिए एडजुडिकेशन कराते हैं।
पुणे, पिंपरी-चिंचवड, मुंबई, ठाणे और पालघर में एग्रीमेंट टू ट्रांसफर
इन सभी शहरों के ग्राहकों के लिए हम एग्रीमेंट टू ट्रांसफर का काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर क्या अलग है:
| शहर | स्थानीय जानकारी |
|---|---|
| पुणे | स्टाम्प ड्यूटी PMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: हवेली और पुणे शहर के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| पिंपरी-चिंचवड | स्टाम्प ड्यूटी PCMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: पिंपरी-चिंचवड का संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (हवेली / मावल / मुलशी)। |
| मुंबई | स्टाम्प ड्यूटी BMC सीमा में 1% मेट्रो सेस सहित 6% (महिलाओं के लिए 5%)। रजिस्ट्रेशन: मुंबई सिटी और मुंबई सबअर्बन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| ठाणे | स्टाम्प ड्यूटी TMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: ठाणे ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (ठाणे, कल्याण, भिवंडी, उल्हासनगर, अंबरनाथ)। |
| पालघर | स्टाम्प ड्यूटी नगर निगम, परिषद या ग्राम पंचायत सीमा के अनुसार ~4–7%। रजिस्ट्रेशन: पालघर ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (वसई, पालघर, डहाणू और अन्य)। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एग्रीमेंट टू ट्रांसफर क्या है?
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट जिसमें व्यक्ति फ्लैट, दुकान, गाला या किराए की जगह में अधिकार दूसरे को ट्रांसफर करने पर सहमत होता है, कीमत, हैंडओवर और सहमति की शर्तों के साथ।
क्या फ्लैट ट्रांसफर के लिए सोसायटी NOC चाहिए?
सोसायटी ट्रांसफर को अनुचित रूप से मना नहीं कर सकती, पर नए मालिक को सदस्य बनने के लिए उसका NOC और शेयर ट्रांसफर ज़रूरी है। हम आवेदन और दस्तावेज़ तैयार करते हैं।
किरायेदारी ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी कैसे निकलती है?
आमतौर पर किरायेदारी अधिकारों के बाज़ार मूल्य पर कन्वेयंस जितनी, किराए वाली जगहों के रेडी रेकनर नियमों से। हम हस्ताक्षर से पहले रकम निकालते हैं।
क्या पगड़ी किरायेदारी ट्रांसफर हो सकती है?
हाँ, मकान-मालिक की सहमति से, आमतौर पर उसे ट्रांसफर प्रीमियम देकर। एग्रीमेंट में सहमति और प्रीमियम दर्ज होते हैं।
एग्रीमेंट टू ट्रांसफर और डीड ऑफ ट्रांसफर में क्या अंतर है?
एग्रीमेंट शर्तें और पेमेंट प्लान दर्ज करता है; शर्तें पूरी होने पर डीड ऑफ ट्रांसफर असल में अधिकार ट्रांसफर करती है। कभी दोनों एक ही रजिस्टर्ड दस्तावेज़ में होते हैं।






