महाराष्ट्र में अचल संपत्ति से जुड़े एग्रीमेंट पर महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम, 1958 के तहत स्टाम्प ड्यूटी लगती है और रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्रेशन होता है। प्रॉपर्टी बिक्री के एग्रीमेंट पर बाज़ार मूल्य पर कन्वेयंस जितनी ड्यूटी लगती है और रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है; डेवलपमेंट एग्रीमेंट पर भी बाज़ार मूल्य पर ड्यूटी लगती है; लीव एंड लाइसेंस पर 0.25%; और जिन एग्रीमेंट का अधिनियम में अलग प्रावधान नहीं, उन पर छोटी फिक्स्ड ड्यूटी। ज़्यादातर प्रॉपर्टी एग्रीमेंट पर रजिस्ट्रेशन फीस मूल्य का 1%, अधिकतम ₹30,000 है।
आपको कौन-सा एग्रीमेंट चाहिए?
| स्थिति | एग्रीमेंट |
|---|---|
| रीसेल फ्लैट, दुकान या प्लॉट खरीदना, बाद में सेल डीड | एग्रीमेंट टू सेल |
| RERA प्रोजेक्ट में बिल्डर से नया फ्लैट | एग्रीमेंट फॉर सेल |
| अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट वाली इमारत (कॉन्डोमिनियम) में फ्लैट | एग्रीमेंट टू अपार्टमेंट |
| सोसायटी फ्लैट, दुकान, गाला या किरायेदारी अधिकार का ट्रांसफर | एग्रीमेंट टू ट्रांसफर |
| कब्ज़े से पहले बुक किया निर्माणाधीन फ्लैट बेचना | एग्रीमेंट टू असाइनमेंट |
| फ्लैट, ऑफिस या दुकान 5 साल तक किराए पर | रेंट एग्रीमेंट / लीव एंड लाइसेंस |
| ज़मीन, इमारत या कमर्शियल जगह की लंबी लीज़ | लीज़ डीड |
| ज़मीन मालिक और बिल्डर के बीच डेवलपमेंट | डेवलपमेंट एग्रीमेंट (POA के साथ) |
दस्तावेज़ को गलत नाम देने से स्टाम्प ड्यूटी कम नहीं होती — कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स देखते हैं कि दस्तावेज़ असल में क्या करता है। शुरू में सही फॉर्म चुनने से बाद में पेनल्टी और दोबारा रजिस्ट्रेशन से बचते हैं।
एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
पक्षकार
- हर पक्षकार का आधार और पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- पक्षकार व्यक्ति न हो तो कंपनी/फर्म दस्तावेज़ और बोर्ड रेज़ोल्यूशन
- किसी और की ओर से हस्ताक्षर हो तो POA
प्रॉपर्टी
- मालिकाना दस्तावेज़: पिछली रजिस्टर्ड डीड और इंडेक्स-II
- 7/12 उतारा या प्रॉपर्टी कार्ड
- नई इमारत के लिए स्वीकृत नक्शा, CC और OC
- लागू हो तो सोसायटी NOC / शेयर सर्टिफिकेट
गवाह
- दो गवाहों का आधार
एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कैसे होती है
- सौदा बताइए
क्या खरीदा, बेचा, ट्रांसफर या किराए पर दिया जा रहा है और तय शर्तें बताइए। हम सही एग्रीमेंट चुनते हैं — नाम पर ही स्टाम्प ड्यूटी निर्भर करती है।
- टाइटल और दस्तावेज़ जाँच
टाइटल चेन और अनुमतियाँ जाँचते हैं ताकि आप किसी दोषपूर्ण प्रॉपर्टी से न बंधें।
- ड्राफ्ट
पेमेंट शेड्यूल, कब्ज़ा, डिफ़ॉल्ट, रद्दीकरण और विवाद क्लॉज़ के साथ ड्राफ्ट WhatsApp पर मंज़ूरी के लिए।
- स्टाम्प ड्यूटी और फीस
स्टाम्प अधिनियम के सही आर्टिकल के अनुसार ड्यूटी निकालकर GRAS ई-चालान बनाते हैं।
- रजिस्ट्रेशन
सब-रजिस्ट्रार स्लॉट बुक करते हैं; पक्षकार दो गवाहों के साथ हस्ताक्षर करते हैं और स्कैन दस्तावेज़ व इंडेक्स-II मिलता है।
अपना एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन बिना उलझन के पूरा करें
अपनी जानकारी WhatsApp पर भेजें। भुगतान से पहले ही हम दस्तावेज़ों की सटीक सूची और स्टाम्प ड्यूटी का अनुमान देते हैं।
महाराष्ट्र में एग्रीमेंट पर स्टाम्प ड्यूटी
- एग्रीमेंट टू सेल / फॉर सेल — तय कीमत और रेडी रेकनर मूल्य में से जो ज़्यादा हो, उस पर कन्वेयंस जितनी ड्यूटी: पुणे, PCMC और ठाणे नगर सीमा में लगभग 7%, मुंबई में 6% (महिला खरीदार को 1% छूट)। एग्रीमेंट पर पूरी ड्यूटी दी हो तो बाद की सेल डीड पर नाममात्र ड्यूटी लगती है।
- डेवलपमेंट एग्रीमेंट — डेवलप होने वाली प्रॉपर्टी के बाज़ार मूल्य पर ड्यूटी।
- लीव एंड लाइसेंस — कुल किराया और डिपॉज़िट पर काल्पनिक ब्याज पर 0.25%।
- लीज़ — अवधि पर निर्भर; देखें लीज़ डीड।
- जिनका अलग प्रावधान नहीं (जैसे प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बिना साधारण MOU) — छोटी फिक्स्ड ड्यूटी।
ज़्यादातर ट्रांसफर-प्रकार के एग्रीमेंट पर रजिस्ट्रेशन फीस मूल्य का 1%, अधिकतम ₹30,000; लीव एंड लाइसेंस के लिए ₹1,000 (शहरी) या ₹500 (ग्रामीण)।
रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है
रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 17 के तहत आंशिक पालन के लिए आधार बनाए जाने वाले अचल संपत्ति बिक्री एग्रीमेंट रजिस्टर्ड होने चाहिए, और जिस दस्तावेज़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था वह बिना रजिस्ट्रेशन के सौदे के सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं हो सकता। बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पर बैंक होम लोन नहीं देते और MahaRERA शिकायत के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट चाहिए। रजिस्ट्रेशन से सार्वजनिक रिकॉर्ड (इंडेक्स-II) बनता है जो विक्रेता द्वारा वही प्रॉपर्टी दोबारा बेचने की कोशिश पर आपकी रक्षा करता है।
पुणे, पिंपरी-चिंचवड, मुंबई, ठाणे और पालघर में एग्रीमेंट ड्राफ्टिंग और रजिस्ट्रेशन
इन सभी शहरों के ग्राहकों के लिए हम एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन का काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर क्या अलग है:
| शहर | स्थानीय जानकारी |
|---|---|
| पुणे | रजिस्ट्रेशन: हवेली और पुणे शहर के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस; ड्राफ्ट, स्टाम्प ड्यूटी और अपॉइंटमेंट हम तय करते हैं। |
| पिंपरी-चिंचवड | रजिस्ट्रेशन: पिंपरी-चिंचवड का संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (हवेली / मावल / मुलशी); ड्राफ्ट, स्टाम्प ड्यूटी और अपॉइंटमेंट हम तय करते हैं। |
| मुंबई | रजिस्ट्रेशन: मुंबई सिटी और मुंबई सबअर्बन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस; ड्राफ्ट, स्टाम्प ड्यूटी और अपॉइंटमेंट हम तय करते हैं। |
| ठाणे | रजिस्ट्रेशन: ठाणे ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (ठाणे, कल्याण, भिवंडी, उल्हासनगर, अंबरनाथ); ड्राफ्ट, स्टाम्प ड्यूटी और अपॉइंटमेंट हम तय करते हैं। |
| पालघर | रजिस्ट्रेशन: पालघर ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (वसई, पालघर, डहाणू और अन्य); ड्राफ्ट, स्टाम्प ड्यूटी और अपॉइंटमेंट हम तय करते हैं। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महाराष्ट्र में प्रॉपर्टी एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?
हाँ — अचल संपत्ति बिक्री एग्रीमेंट, डेवलपमेंट एग्रीमेंट और सभी लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट के लिए। इन्हें हस्ताक्षर के चार महीने के भीतर सब-रजिस्ट्रार के सामने पेश करना होता है।
महाराष्ट्र में एग्रीमेंट पर स्टाम्प ड्यूटी कितनी है?
प्रकार पर निर्भर। सेल एग्रीमेंट पर कन्वेयंस जितनी (शहर सीमा में लगभग 6–7%), डेवलपमेंट एग्रीमेंट पर बाज़ार मूल्य पर, लीव एंड लाइसेंस पर 0.25% और बिना अलग प्रावधान वाले एग्रीमेंट पर छोटी फिक्स्ड ड्यूटी।
क्या आप हर तरह का एग्रीमेंट ड्राफ्ट और रजिस्टर कर सकते हैं?
हाँ। पुणे, पिंपरी-चिंचवड, मुंबई, ठाणे और पालघर में हम एग्रीमेंट टू सेल, एग्रीमेंट फॉर सेल, ट्रांसफर, असाइनमेंट, अपार्टमेंट, डेवलपमेंट, लीज़ और लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट ड्राफ्ट व रजिस्टर करते हैं।
क्या एग्रीमेंट घर पर रजिस्टर हो सकता है?
केवल लीव एंड लाइसेंस (रेंट) एग्रीमेंट घर पर आधार बायोमेट्रिक से ऑनलाइन रजिस्टर होते हैं। सेल, ट्रांसफर, असाइनमेंट और डेवलपमेंट एग्रीमेंट सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में साइन होते हैं; हम सब तैयारी करके अपॉइंटमेंट बुक करते हैं।
एग्रीमेंट रजिस्टर न हो तो क्या होता है?
वह सौदे के सबूत के रूप में मान्य नहीं होता, बैंक उस पर लोन नहीं देते और बाद में पेनल्टी सहित स्टाम्प ड्यूटी मांगी जा सकती है। इस बीच दूसरा पक्ष प्रॉपर्टी का सौदा कर सकता है।
एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन में कितना समय लगता है?
दस्तावेज़ पूरे होने के बाद ड्राफ्टिंग में 1–2 कार्यदिवस। रजिस्ट्रेशन बुक की गई तारीख पर होता है और स्कैन दस्तावेज़ आमतौर पर उसी दिन मिल जाता है।






